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जिले के संवेदनशील कलेक्टर एवम एसडीएम ने नगरवासियों के जनआस्था को देखते हुए मेला समिति को दिया अनुमति

*जिले के संवेदनशील कलेक्टर एवम एसडीएम ने नगरवासियों के जनआस्था को देखते हुए मेला समिति को दिया अनुमति**
**जिला प्रशासन ने सशर्त 40 बिंदुओं पर दिया विष्णु महायज्ञ और हरिहाट मेला करने की अनुमति**
**मेला समिति और नगरवासियों की आस्था की हुई जीत**
**नगरवासियों के लिए विष्णु महायज्ञ मेला है आस्था का प्रमुख केंद्र**
**पिछले कई वर्षों से मेला का होता रहा है आयोजन**
सारंगढ़ खबर न्यूज,सारंगढ—— -सारंगढ़ के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व के श्री विष्णु महायज्ञ एवं गणतंत्र मेला (हरिहाट ) के 75 वें आयोजन की अनुमति देने हेतु जिला प्रशासन पशोपेश में नजर आ रही थी,परंतु सारंगढ अनुविभागीय दंडाधिकारी एवं मेला समिति के सदस्यों के बीच बैठकों का कई दौर चलने के बाद भी जिला प्रशासन अनिर्णय की स्थिति में था,परंतु अब जिले के संवेदनशील कलेक्टर संजय कन्नौजे ने सारंगढ में पिछले कई वर्षों से चले आ रहे धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत जो सारंगढ़वासियो के लिए एक आस्था का प्रमुख केंद्र बना है उस विष्णु महायज्ञ और गणतंत्र मेला को करने की अनुमति प्रदान करने का निर्णय लिया है।सारंगढ़ विगत कुछ दिनों से श्री हरिहाट मेले के आयोजन को लेकर चल रहा गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है,सारंगढ एसडीएम वर्षा बंसल ने सशर्त 40 बिंदुओं के तहत अनुमति दिया है ।अनुमति मिलने से आज होने वाला सारंगढ़ बंद को भी आयोजन समिति ने निरस्त कर दिया है जिससे क्षेत्र, व नगरवासियों में हर्ष की माहौल है ।
आपको बता दे कि सारंगढ खबर अखबार के संपादक रवि तिवारी ने जब सारंगढ एसडीएम सुश्री वर्षा बंसल से फोन पर बात की तो उन्होंने बताया कि जिला कलेक्टर ने नगरवासियों की हित व आस्था को देखते हुए वर्षो से हो रहे विष्णु महायज्ञ व हरिहाट मेला को करने अनुमति प्रदान करने का निर्णय लिया है। लगभग 74 वर्षो से लगातार एक ही जगह पर  होने वाले इस विष्णु महायज्ञ मेला सारंगढ़वासियो के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। चुकि 26 जनवरी नजदीक है और समिति को मेला की तैयारी करनी पड़ती है ऐसी स्थिति में 15 जनवरी को मेला समिति द्वारा वस्तु स्थिति से नगर वासियों को अवगत कराने हेतु नागरिकों की अहम बैठक बुलाया गया था, बैठक में उपस्थित सभी लोगो ने सारंगढ राजपरिवार के अड़ियल रवैये के प्रति गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए सर्व सम्मती से यदि 16 जनवरी तक अनुमति प्राप्त नहीं होती है तो 19 जनवरी को नगर बंद एवं 20 जनवरी को चक्का जाम करने का निर्णय लिया गया था,जिसकी सूचना सारंगढ अनुविभागीय दंडाधिकारी सारंगढ़ को लिखित में दी जा चुकि है, सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि इस बीच मेला समिति के सदस्यों ने 16 जनवरी को प्रदेश के वित मंत्री ओ पी चौधरी से भी भेंट कर वस्तु स्थिति से अवगत कराया था। वित्त मंत्री द्वारा सारंगढ कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक से बात कर अनुमति जारी करने का निर्देश भी दिया गया है।सारंगढ मेला समिति ने 18 जनवरी तक विष्णु महायज्ञ,व मेला करने की अनुमति प्रदान करने जिला प्रशासन से गुहार लगाई थी,जिसको देखते हुए जिला प्रशासन ने मेला समिति को गणतंत्र मेला करने की अनुमति प्रदान कर दी है।कुछ दिनों पूर्व जिले के हिन्दूवादी संगठनों विश्व हिन्दू परिषद, अंतर्राष्ट्रीय हिन्दू परिषद, गौरक्षा क्रांति दल, परशुराम सेवा समिति के पदाधिकारीयों ने कलेक्टर सारंगढ़ से भेंट कर शीघ्र ही अनुमति जारी करने हेतु ज्ञापन सौपा था। उल्लेखनीय है कि सारंगढ़ में श्री विष्णु महायज्ञ एवं गणतंत्र मेला हरिहाट की शुरुवात राजा नरेश चंद्र सिंह ने 1952 में विश्व शांति, लोक कल्याण एवं देश के अमर शहीदों की याद को चिरस्थायी रखने हेतु पुरी के शंकराचार्य के सानिध्य एवं मार्गदर्शन में प्रारम्भ कराया था  तब से लेकर आज पर्यन्त तक नगर वासी इस परम्परा को पूर्वजों की विरासत मानकर  जारी रखे हुए हैँ इस आयोजन में भविष्य में किसी प्रकार का व्यवधान एवं खलल न पड़े इस हेतु इस स्थल पर भवन निर्माण हेतु राजा नरेश चंद्र सिंह की बुआ मानकुमारी देवी ने अपने भाई राजा जवाहिर सिंह की स्मृति में भवन बनाने हेतु रु 25000/(पच्चीस हजार) दान स्वरूप दी थीं जिसका  राजा नरेश चंद्र सिंह ने 1956 में एक ट्रस्ट (जवाहिर भवन ट्रस्ट ) का गठन कर तात्कालिक कलेक्टर एवं पुलिस कप्तान की गवाही में रजिस्टर्ड एग्रीमेंट निष्पादित किया था जिसमें कहा गया है कि जवहिर भवन खसरा नम्बर 1148 कुल रकबा 1 एकड़ 99 डिसमिल में 6 डिसमिल पर जवाहिर भवन स्थित है) एवं आस पास के खुली क्षेत्रों का उपयोग नगर वासियों के आमोद प्रमोद एवं उनके धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यों के आयोजन के लिए किया जा सकेगा यहाँ विशेष उल्लेखनीय यह है कि जवाहिर भवन का शिलान्यास मध्यप्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित रवि शंकर शुक्ल ने 1954 में एवं लोकार्पण 1956 में एवं नगर वासियों को समर्पित (लोकार्पण) देश के प्रथम राष्ट्रपति, भारत रत्न डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने किया था, तथा 1956 में ही मध्यप्रदेश सरकार ने नजुल मेंटेनेन्स खसरा नम्बर 898/2 एवं 899/2 कुल 40000/(चालीस हजार वर्ग फिट भूमि जवाहिर भवन ट्रस्ट को स्थायी पट्टा प्रदान किया है सूचना के अधिकार के तहत राष्ट्रपति भवन सचिवालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार जवाहिर भवन के आसपास कुल साढ़े सात एकड़ शासकीय भूमि है, अव चुंकि इस मगायज्ञ एवं मेला की शुरुवात हिन्दुओं के सर्वोच्च धर्मगुरु शंकराचार्य के सानिध्य में जन कल्याण की भावना से राजा नरेश चंद्र सिंह द्वारा कराया गया था व प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री द्वारा शिलान्यास, देश के प्रथम राष्ट्रपति द्वारा नागरिकों को समर्पित किया गया था इसीलिए इस स्थान के प्रति स्थानीय लोगों के मन में गहरी आस्था व श्रद्धा है।जिला प्रशासन ने नगरवासियों के हित और आस्था को देखते हुए मेला समिति के पदाधिकारियों को मेला करने अनुमति प्रदान करने का निर्णय लिया है।

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