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सारंगढ़-बिलाईगढ़: मोटी फीस के बाद भी खतरे में नन्हे मासूमों की जान, प्राइवेट स्कूलों की वैनों में ठूंस-ठूंस कर भरे जा रहे बच्चे*

*सारंगढ़-बिलाईगढ़: मोटी फीस के बाद भी खतरे में नन्हे मासूमों की जान, प्राइवेट स्कूलों की वैनों में ठूंस-ठूंस कर भरे जा रहे बच्चे*

*सारंगढ़, *
सारंगढ बिलाईगढ़ जिले के प्राइवेट स्कूलों में मोटी फीस वसूलने के बाद भी बच्चों के परिवहन में घोर लापरवाही सामने आ रही है। नन्हे मासूमों की जिंदगी खतरे में डालकर स्कूल संचालक पुरानी और ओवरलोड वैनों से परिवहन कर रहे हैं।

जिले में सुबह-शाम बिलाईगढ़ विकास खण्ड,बरमकेला विकासखण्ड,सारंगढ विकासखण्ड,के ग्रामीण सड़कों एवम विकास खण्ड मुख्यालय के सड़को पर देखा जा सकता है कि 12 से 15 सीटर क्षमता वाली वैनों में 25 से 30 बच्चों को ठूंस-ठूंस कर ले जाया जा रहा है। ज़िले के किसी भी स्कूल के वैनों एवम छोटी वाहनों में सुरक्षा जाली नही लगा है।साथ ही कई वाहनों में न तो पीला रंग है, न स्कूल का नाम और न ही महिला अटेंडेंट। जबकि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश हैं कि स्कूल वाहन पीले रंग का हो, उस पर स्कूल का नाम और फोन नंबर लिखा हो, और हर वाहन में महिला अटेंडेंट अनिवार्य रूप से हो।

*नियमों की खुलेआम धज्जियां:*
सूत्रों के अनुसार जिले के 70 प्रतिशत से अधिक प्राइवेट स्कूलों के पास खुद की बसें नहीं हैं। वे निजी ऑटो और पुरानी वैनों को किराए पर चलाते हैं, जिनका फिटनेस और परमिट भी समाप्त हो चुका है। ड्राइवरों का पुलिस वेरिफिकेशन तक नहीं कराया गया है। सबसे गंभीर बात यह है कि अधिकांश वाहनों में स्पीड गवर्नर, GPS और CCTV जैसी बुनियादी सुरक्षा सुविधाएं भी नहीं हैं। ज़िले में परिवहन कार्यलय एवम यातायात पुलिस नही होने से इन प्राइवेट स्कूलों की मनमानी चरम सीमा पर है।

*पालकों में आक्रोश:*
पालकों का कहना है कि स्कूल एडमिशन के समय बिल्डिंग फीस, बस फीस और एक्टिविटी के नाम पर भारी फीस लेने के बाद भी बच्चों की सुरक्षा पर एक रुपया भी खर्च नहीं किया जाता। फोरलेन निर्माण के कारण सड़कों की स्थिति पहले से ही खराब है, ऐसे में ओवरलोड वाहनों से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

*क्या कहता है कानून:*
मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 199A के तहत ओवरलोड और बिना परमिट स्कूल वाहन चलाने पर 25,000 रुपये तक जुर्माना और स्कूल की मान्यता रद्द करने का प्रावधान है।

*प्रशासन से मांग:*
ज़िला प्रशासन,पुलिस अधीक्षक ,
जिला शिक्षा अधिकारी और यातायात पुलिस सेपालक गण ने मांग की है कि जिले के सभी प्राइवेट स्कूल वाहनों की सघन जांच कराई जाए, ओवर लोड रोका जाये, और नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर तत्काल कार्यवाही की जाए।

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