सारंगढ़-बिलाईगढ़सारंगढ़ स्वास्थ्य विभाग

जिले में लोगो के सेहत से खिलवाड़, बॉयलर मुर्गियों को इंजेक्शन लगा कर बेचा जा रहा

*जिले में लोगो के सेहत से खिलवाड़, बॉयलर मुर्गियों को इंजेक्शन लगा कर बेचा जा रहा**

**जल्दी वजन, इंजेक्शन का खेल! बायलर मुर्गियों पर सवाल**

सारंगढ़-बिलाईगढ़। जिले में इन दिनों बायलर मुर्गियों के उत्पादन और बिक्री को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि मुर्गी फार्मों में मुर्गियों को कम समय में ज्यादा वजनदार बनाने के लिए इंजेक्शन और दवाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो सकता है।जानकारों के अनुसार सामान्य तौर पर एक मुर्गी को तैयार होने में करीब 40 से 45 दिन का समय लगता है, लेकिन कई फार्मों में 25 से 30 दिनों में ही मुर्गियों को बाजार में उतार दिया जा रहा है। वजन बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रकार की दवाओं और इंजेक्शनों का उपयोग किए जाने की चर्चा भी सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में मुर्गी फार्मों और चिकन दुकानों की नियमित जांच नहीं होने से यह स्थिति बनी हुई है। यदि समय-समय पर पशु चिकित्सा विभाग और खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा सख्त जांच की जाए, तो इस तरह की गड़बड़ियों पर रोक लगाई जा सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं या इंजेक्शन से तैयार मुर्गियों का मांस खाने से शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इससे एलर्जी, हार्मोन असंतुलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होने की आशंका बनी रहती है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जिले के मुर्गी फार्मों और चिकन दुकानों की नियमित जांच कराई जाए, ताकि लोगों को सुरक्षित और स्वास्थ्यकर भोजन मिल सके। साथ ही आम लोगों से भी अपील की जा रही है कि वे ताजा और भरोसेमंद जगहों से ही चिकन खरीदें, ताकि अपनी और अपने परिवार की सेहत को सुरक्षित रख सकें।

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