लालाधुरवा, जोंगनीपाली, कपिसदा (ब) क्षेत्र में खदान विरोध पर बढ़ा आक्रोश
पहले ग्रामीणों के विरोध से स्थगित हुई थी जनसुनवाई, अब 17 नवंबर को फिर तय — प्रशासन पर पक्षपात के आरोप*

*लालाधुरवा, जोंगनीपाली, कपिसदा (ब) क्षेत्र में खदान विरोध पर बढ़ा आक्रोश*
*पहले ग्रामीणों के विरोध से स्थगित हुई थी जनसुनवाई, अब 17 नवंबर को फिर तय — प्रशासन पर पक्षपात के आरोप*
सारंगढ़ खबर न्यूज,सारंगढ—–। तहसील सारंगढ़ के लालाधुरवा, जोंगनीपाली, कपिसदा (ब), सरसरा और धौराभांठा गांवों में प्रस्तावित मेसर्स ग्रीन सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग प्रा. लि. की लाइम स्टोन खदान परियोजना को लेकर ज़बरदस्त विरोध शुरू हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी और प्रशासन की मिलीभगत से उपजाऊ भूमि, जंगल और जलस्रोतों को तबाह करने की साज़िश की जा रही है।
पिछली बार ग्रामीणों के तीव्र विरोध के कारण जनसुनवाई की तारीख स्थगित कर दी गई थी, लेकिन अब प्रशासन ने 17 नवंबर 2025 (सोमवार) को दोबारा जनसुनवाई तय कर दी है। यह सुनवाई सुबह 10 बजे ग्राम पंचायत कपिसदा (ब) में आयोजित होगी। नई तारीख जारी होते ही क्षेत्र का माहौल फिर से गरमा गया है।
*कोर्ट को गुमराह कर फिर तय की गई तारीख – ग्रामीणों का आरोप*
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पहले कलेक्टर और अधिकारियों ने जनसुनवाई स्थगित कर कोर्ट को गुमराह किया, जिसके बाद मामला निरर्थक बताते हुए 24 सितंबर 2025 को न्यायालय ने खारिज किया। अब वही अधिकारी नई तारीख घोषित कर पुनः जनसुनवाई कराने की तैयारी में हैं। ग्रामीणों ने इसे न्यायालय के आदेश की खुली अवहेलना और प्रशासनिक साज़िश करार दिया है। धौराभांठा निवासी सालिक पटेल का कहना है की जब मामला कोर्ट में था, तब तारीख रद्द की गई। जैसे ही मामला खारिज हुआ, दोबारा तारीख तय कर दी गई। यह दिखाता है कि प्रशासन कंपनी के दबाव में है।
*हमारा जीवन खतरे में है, जमीन नहीं देंगे*
ग्राम कपिसदा (ब) के किसान रामलाल ध्रुव का कहना है की हमारे खेतों से ही हमारा जीवन चलता है। खदान खुली तो मिट्टी उड़ जाएगी, पानी सूख जाएगा। हमें रोजगार नहीं, बर्बादी मिलेगी।
*ग्राम लालाधुरवा की महिला समिति ने कहा —*
हम पानी, जंगल और ज़मीन पर निर्भर हैं। कंपनी आई तो सब कुछ उजड़ जाएगा। हम अपनी ज़मीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे।
*परियोजना का विवरण (सरकारी अभिलेख अनुसार)*
*कंपनी का नाम: मेसर्स ग्रीन सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग प्रा. लि.
*स्थान: लालाधुरवा, जोंगनीपाली, कपिसदा (ब), सरसरा, धौराभांठा – तहसील सारंगढ़
*खनिज: चूना पत्थर (Major Mineral)
*वार्षिक उत्पादन क्षमता: 36,54,413.97 टन
*अपशिष्ट (OB/Waste): 5,54,058.50 टन
*कुल हैंडलिंग: 42,08,472.47 टन (excluding top soil)
*क्रशर संयंत्र क्षमता: 700 TPH
*कुल क्षेत्रफल: 200.902 हेक्टेयर
*सरकारी भूमि – 5.095 हेक्टेयर
*निजी भूमि – 189.509 हेक्टेयर
*वन भूमि – 6.298 हेक्टेयर
*पहले तारीख स्थगित, अब फिर दबाव में तय — बढ़ा तनाव*
ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी के दबाव में प्रशासन जनसुनवाई दोबारा तय कर रहा है। बिना जनता की सहमति के यह जनसुनवाई लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।
*पर्यावरण कार्यकर्ता रमेश ने कहा —*
जनसुनवाई अब केवल औपचारिकता बन गई है। जनता विरोध में है तो ऐसी प्रक्रिया का क्या औचित्य?
*गांवों में बैठकों का दौर, आंदोलन की तैयारी*
नई तारीख की घोषणा के साथ ही ग्राम पंचायतों ने सामूहिक विरोध प्रस्ताव तैयार करना शुरू कर दिया है। किसान मंच, युवा संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता भी इस आंदोलन को समर्थन देने के लिए आगे आ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, 17 नवंबर को जनसुनवाई स्थल पर हज़ारों ग्रामीणों के जुटने की संभावना है। यदि प्रशासन ने बलपूर्वक कार्यवाही की कोशिश की, तो स्थिति गंभीर हो सकती है और बड़ा आंदोलन भड़कने की आशंका है।
*अब सवाल यह है — जब जनता ही विरोध में है, तो किसके लिए हो रही यह जनसुनवाई?*
*क्या प्रशासन कंपनी के हित में कोर्ट के आदेशों की अनदेखी कर रहा है?*
*जनता की नज़र अब प्रशासन की अगली चाल पर टिकी है।*





