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शिक्षा व्यवस्था पर ग्रहण: प्रधान पाठक की लापरवाही से बच्चों के भविष्य पर संकट, ग्रामवासियों ने उठाई कार्यवाही की मांग

ग्रामीणों ने जिला शिक्षाधिकारी एवं कलेक्टर से की शिकायत

शिक्षा व्यवस्था पर ग्रहण: प्रधान पाठक की लापरवाही से बच्चों के भविष्य पर संकट, ग्रामवासियों ने उठाई कार्यवाही की मांग

1.शाला परिसर में नशे में धुत सोया रहता है शिक्षक
2.ग्रामीणों ने जिला शिक्षाधिकारी एवं कलेक्टर से की शिकायत

सारंगढ़ खबर न्यूज,सारंगढ़—— । शिक्षा को समाज का मेरुदंड कहा जाता है, लेकिन जब यही व्यवस्था लापरवाही और अनदेखी का शिकार हो जाए, तो सबसे अधिक नुकसान भविष्य निर्माता नौनिहालों को उठाना पड़ता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है ग्राम मिरचीद के उपरपारा स्थित शासकीय प्राथमिक शाला का, जहां प्रधान पाठक गेंदलाल अमलीवार की लगातार अनाधिकृत अनुपस्थिति ने न केवल शिक्षा व्यवस्था को हिला कर रख दिया है, बल्कि बच्चों के भविष्य पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

ग्रामवासियों के अनुसार, उक्त शाला में कुल 65 छात्र पंजीबद्ध हैं और कुल 3 शिक्षक पदस्थ हैं, लेकिन प्रधान पाठक श्री अमलीवार द्वारा बिना किसी सूचना के लम्बे समय से विद्यालय से अनुपस्थित रहना आम बात बन चुकी है। न तो समय पर उपस्थिति होती है, न ही शैक्षणिक उत्तरदायित्व का निर्वहन। परिणामस्वरूप विद्यार्थियों की शिक्षा गुणवत्ता में गंभीर गिरावट आई है। जहाँ ग्रामीणों ने बताया कि उक्त प्रधानपाठक कभी स्कूल भी आजाये तो शाला परिसर में ही नशे में धूत जहाँ तहा पड़े रहता है । या कुर्सी पर सोए रहता है । जिससे बच्चों के मनः स्थिति पर बहुत ही बुरा प्रभाव भी पड़ रहा है ।

शिक्षा के अधिकार अधिनियम और शिक्षक आचार संहिता की अवहेलना करते हुए इस प्रकार की गैर-जिम्मेदाराना हरकत न केवल विभागीय अनुशासन को ठेंगा दिखा रही है, बल्कि ग्रामीणों के धैर्य की भी परीक्षा ले रही है।

ज्ञात हो कि गत दिनों ग्राम के सरपंच एवं जनप्रतिनिधियों ने जिला शिक्षा अधिकारी एवं जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए उक्त शिक्षक पर कड़ी कार्यवाही व स्थानांतरण की मांग की है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस मामले में पूर्व में भी विकासखंड शिक्षा अधिकारी को आवेदन सौंपा जा चुका है, जिसकी प्रतिलिपि वर्तमान आवेदन के साथ संलग्न की गई है, लेकिन उक्त शिक्षक अमलीवार के विरुद्ध अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

प्रश्न यह है कि क्या विभाग प्रधान पाठक की इस घोर लापरवाही को नजरअंदाज करता रहेगा? क्या निरीक्षण तंत्र सिर्फ कागजों तक सीमित रह गया है? और सबसे बड़ा सवाल — क्या बच्चों की शिक्षा से जुड़ा यह विषय अब भी किसी ठोस हस्तक्षेप का इंतजार कर रहा है?

ग्रामवासियों की आवाज़ अब मुखर हो चुकी है। आवश्यकता है कि प्रशासन त्वरित संज्ञान लेकर शिक्षा व्यवस्था की गरिमा को पुनर्स्थापित करे तथा लापरवाह शिक्षक पर यथोचित कार्यवाही करे ।

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